
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कमंडल और खड़ाऊं से लैस एक ऋषि ब्लॉगिया दुनिया में अवतरित हो गया है। चूंकि खड़ाऊं आम चल रहे हैं तो बचा कंमडल में श्राप या आशीर्वाद का जल। अब यह तो मनुष्य की मनुष्यता या दुष्टता पर निर्भर करेगा कि किसे क्या मिलेगा। कार्टूनों की यह बौछार नेताओं और नौकरशाहों के कर्म आचरण पर निर्भर करेगी..
5 comments:
सही बात है...राजनीति में आए हो तो hypocrisy तो सीखनी ही होगी...इन्हें याद रखना चाहिए कि राजनीति में 'राजा नंगा है' कभी नहीं कहते
तीर एकदम निशाने पर लगा है गुरु ! बहुत बढिया !!
मज़ेदार।
अमेरीका और भारत में अंतर है. मजाक में भी किसी का अपमान सही नहीं. शायद यह बात शशी भाई समझ गए होंगे.
अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे...
कार्टून जोरदार है
Post a Comment