
Friday, September 18, 2009
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कमंडल और खड़ाऊं से लैस एक ऋषि ब्लॉगिया दुनिया में अवतरित हो गया है। चूंकि खड़ाऊं आम चल रहे हैं तो बचा कंमडल में श्राप या आशीर्वाद का जल। अब यह तो मनुष्य की मनुष्यता या दुष्टता पर निर्भर करेगा कि किसे क्या मिलेगा। कार्टूनों की यह बौछार नेताओं और नौकरशाहों के कर्म आचरण पर निर्भर करेगी..
2 comments:
साथ ही याद रखना, गौ शाला का मतलब 10 जनपथ नहीं है. :)
बड़े बोल बोलने वाले एक बार आम आदमी बनकर जरा ट्रेन के जनरल डिब्बे में यात्रा कर लें, सारी हेकड़ी भूल जाएंगे। आपने करारा जवाब दिया है हरिओम जी। इन पर इसी तरह के कटाक्ष करते रहें। अच्छे और गंभीर कॉर्टून के लिए बधाई
डॉ महेश परिमल
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