Sunday, January 10, 2010

कोहरे में दिख ही नहीं रहे बेचारे !


2 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

मुर्गी, अंडे की कहानी है ये...अच्छी हाकी नहीं खेलते इसलिए पैसा नहीं ...पैसा नहीं इसलिए अच्छी हाकी नहीं खेल पाते...

Udan Tashtari said...

हाकी का तो यही हाल है...