Thursday, May 14, 2009

आज थोड़े दर्द की बात, कार्टून बाद में

कल किसी गुमनाम महाशय ने आरोप लगाया था कि मैने कप्तानजी के कार्टून से प्रेरित होकर यह कार्टून बनाया है। इससे मन आहत हुआ है, एक पल को सोचा ब्लॉग बंद कर दूं। अपने बीस वर्षो के करियर में पहली बार मुझे किसी ने ऐसी टिप्पणी की, वह भी गुमनाम।

कार्टूनिस्ट के अवचेतन मन में उसके बनाए पुराने कार्टून कौंधते रहते हैं। इसी के फलस्वरुप स्थिति के हिसाब से कई बार वह अपने पुराने सृजन से मिलती-जुलती कृति दोहराता है। कई बार एक ही विचार एक ही समय में आकाशगंगा में तैरता हुआ दो व्यक्तियों के मन मस्तिष्क में कौंधता है।

इसका अर्थ यह नहीं होता कि दूसरे व्यक्ति ने किसी के विचार की नकल की हैं महाशयजी को यह बताना चाहूंगा कि वर्षो पहले इसी तरह तरह का कार्टून मेरे द्वारा बनाया गया था। कभी कभी सम्माननीय आर के लक्ष्मण साहब के काटरून में भी अपने पुराने संग्रह से प्रेरणा का अंश दिखाई देता और अमूमन यह सामान्य सी बात है।

कार्टूनिस्टों की जो नई पौध पनप रही है, कभी- कभी वे वरिष्ठ कार्टूनिस्टों के सृजन से प्रेरणा लेकर ही अपनी दिशा तय करते है, तथा कार्टून कला के सिद्वांतों को समझते हैं और श्रेष्ठ सृजन के लिए प्रयासरत रहते हैं।

लंबी दिमागी माथापच्ची और मानसिक पीड़ा के बाद ही एक कार्टून का जन्म होता है। कार्टूनिस्ट समाज की अनियमितताओं व विषमताओं से परेशान रहता है। स्वयं दर्द में डूबकर ही वह पाठकों को मुस्कान के साथ ही विचारमनन की प्रेरणा देता है। कार्टूनिस्ट का यह दायित्व होता है कि वह समाज की विद्रूपता पर इस तरह से कटाक्ष करे कि वह व्यक्तिगत न लगे, जो कि काटरूनिस्टों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है।

मैं काजल कुमार जी व कप्तान जी का आभारी हूं, जिन्होंने काटरूनिस्ट होने के नाते मेरी भावनाओं को समझा।

17 comments:

आशीष said...

यह बहुत गलत है. बेनामी का पता लगाकर उसे सामने लाना जरुरी है. आशीष

Jayant Chaudhary said...

हरी ओम जी,

जैसा मैं कल भी कहा था... आप इसे दिल पर मत लीजिये.
कमेंट्स तो उसी पर किये जाते हैं जो कुछ होता है..
आप बस कर्म करें, फल की चिंता ऊपर वाले पर छोड़ दें..
हम आपके साथ हैं..

~जयंत

अविनाश वाचस्पति said...

कार्टून बनाए जाओ
टिप्‍पणियों की चिंता
मत करो हे पार्थ

तुम क्‍या साथ लाए थे
क्‍या साथ लेकर जाओगे
जब कोई साथ लेकर
नहीं आता जाता
तो
काहे का शोक मनाता
है मना, ऐसे शोक को
करो सदा के लिए मना
हरिओम जी महामना।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

छोडो भाई, कार्टून बनाओ, खुद भी हंसो दूसरों को भी मुस्कुराहटें बांटो.
वैसे आइडिया अच्छा है...
किसी का ब्लॉग बंद करवाना हो तो उस पर अनाम बनकर एक ज़हर भरा बिच्छू छोड़ आओ :-)

अविनाश वाचस्पति said...

एक कार्टून
काजल जी की
सलाह पर भी
हो जाए
तो बेनामी
बेपानी हो जाए।

आरडीएक्स said...

भाई हरिओम, Anonymous जी ने जो आरोप आप पर पर लगाया है उस पर आहत होना ठीक नहीं, इसे दिल पे मत लो . ये सच है कि आपका और कप्तान का कार्टून मिलता-जुलता है पर एक कार्टूनिस्ट होने के कारण मैं समझता हूँ कि एक प्रोफेशनल कार्टूनिस्ट कभी नक़ल करने कि हिम्मत नहीं कर सकता है क्योंकि उसके कार्टून को एक-दो-पॉँच-पचास नहीं हजारों -लाखों पाठक देखते हैं, और वो जानता है कि यदि नक़ल करेगा तो एक नजर मे पकडा जायेगा. फिर वो नक़ल कैसे कर सकता है , Anonymous जी भी शायद ये समझते हैं इसीलिय उन्होंने आरोप तो लगाया पर 'गुमनाम' रह कर...जहाँ तक इस कार्टून का सवाल है हरिओम, तो याद करो ये एक घिसा-पिटा आयडिया है और हो सकता है आज से दस साल पहले ऐसे ही किसी मौके पर इसे आपने ही बनाया हो....

Udan Tashtari said...

कहाँ आप भी बेनामियों को कान दे कर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं. बेनामी...का मतलब होता है..डिलीट करो...तुरन्त!!!

अपना काम करते रहें पूर्ण लगन से बिना विचलित हुए. हमारे यहाँ तो बेनामी विथ बेहूदगी अप्रूव करने का फैशन ही नहीं है. :)

संगीता पुरी said...

आप किसी की बात का बुरा मानकर व्‍यर्थ चितित हैं .. अपने कर्तब्‍य पथ पर आगे बढते रहें।

Kirtish Bhatt, Cartoonist said...

ब्लॉग बंद करने का तो सोचिये भी मत आप. वर्ना में भूख हड़ताल कर दूंगा. बड़ी मुश्किल से तो आप पधारे हैं इस दुनिया में. आप वो बात दिल से लगा बैठे हरिओम जी जिस पर खुद लिखने वाले को भी यकीं नहीं था. अगर उन्हें अपनी बात पर यकीन होता तो वे सामने आकार टिप्पणी करते इस तरह छुपकर नहीं. यह सिर्फ संयोग की बात है, वे कार्टूनिस्ट होते तो शायद समझ पाते कि कई बार ऐसा हो जाता है. आप ऐसी बातों से विचलित ना हो. ब्लॉग्गिंग जारी रखिये. ... इस प्रकार की बातों को ना अपने ब्लॉग पर और ना अपने दिलो-दिमाग पर जगह दें.
शुभ ब्लोगिंग.
शुभ कामनाएं.

Anonymous said...

jo dar gya....woh mar dya

cartoonist ABHISHEK said...

प्रिय हरिओम
उन भूतों से क्या घबराना जो
अपना चेहरा छुपा के आते हें..
जो अपना परिचय छुपाये वो खुद क्या होगा...?
समझा जा सकता है.
हाथी चलता रहता है, सड़क पर कुत्ते भोंकते रहते हें....
हाथी मुड़कर भी नहीं देखता..

ब्लॉग की दुनिया में ऐसे भूतों की कमी नहीं..
इन्हे झेलना सीखो..

kaptan said...

aree sir aap bhi kaha aise logo ki baaton me aate he... chodiye ...aisi anam tippani to mere pass bhi aati he ...me delete kar deta ho ..is me itna dukh karne ki koi wazha nahi he..... aap ek cartoonist ho ..aur cartoonist har paristithiyun se ladta rehata he.. samna karta he.......
mujhe par bhi bahut bahut arop lage he ki me lahari ji ki nakal karta ho..... wese wo mere guru he ..kuch ansh unka bhi he.... par me nahi ghabrata kisi se.... aur apna kaam karta rehata ho.......

aapko batana chahunga ki.. aap delhi k cartoonist irfaan k blog par jaieye.. aur dekhiye ki log un k cartoon par kitni bhaddi comments dete he... kuch log to un par ilzaam laga kar galiyan tak dete he.. par wo kisi se kuch nahi kehate chup-chap apna kaam karte he ......aap zarur dekhiyega irfaan ji ka bolg aur un k purane cartoons ki comment bhi zarur dekhiyega......

kaptan said...
This comment has been removed by the author.
kaptan said...

bas kaam me man lagaieye ....

kaptan said...

bas kaam me man lagaieye ....

Shefali Pande said...

is vishay par avinash jee se sahmat....ek cartoon is par bhi..

Anonymous said...

Kaptan Ji,

Irfaan ke cartoons sirf BJP ke khilaaf hote hain.
Kabhi Congress aur Muslimon ke bure kratyon par nahin!!
Isiliye woh nishpaksh nahin kahe jaa sakate.
Isiliye woh cartoonist bhi nahin kahe jaa sakate..
Isiliye woh shikar hain bure comments ke.

Kintu aap, Hari Om and Kajal ji sachmuch ke cartoonist hain.

Jo nishpaksh bhaav se teekhi baat kahen wo sachcha cartoonist, jaise ki Lakshamn saheb.